चल मोहब्बत से दो चार होते है
हँसी से दूर दर्द के पास होते है
खो जाते है किसी की आंखों में आज
फिर पता चले डूबते है कि पार होते है -VAIBHAVRV
Sunday, April 29, 2018
चल मोहब्बत
Saturday, April 28, 2018
Friday, April 27, 2018
बहन
संग खेलेंगे संग घूमेंगे अपनी बचपन की गलियों में
बहुत लड़ेंगे बहुत झगड़ेगे हम बचपन की गलियों में
वक़्त जो होगा पढ़ने का तो संग बैठ के पढ़ लेगे
होगी जो मुश्किल राहे संग चल के गुज़र लेगे
छोटी छोटी बात पे माँ हम अपनी बहन से हारेंगे
जो होगी उसके चेहरे पे हँसी हम जान भी अपनी वारेगें
जो होगी तकलीफ कही पर उसकी ढाल बन जायगे
बचपन की ये सारी बाते दर्द बड़ा दे जाती है
जब रातो को रोज़ किसी की बहन कही खो जाती है -VAIBHAVRV
ज़िन्दगी
अब न पता न कुछ खबर
किस मोड़ पर रुक जायगे ये कदम
क्या ज़िन्दगी क्या मौत कहा तक चलेंगे वो साथ हमारे -VAIBHAVRV
मेहंदी
इस मेंहदी के रंग की बात निराली लगती है
सारा जीवन महका देती जब नाम पिया के लगती है
खिलती हूँ चहकती हूँ जब कुमकुम बिंदिया से सजती हूँ
दिल घबराता कुछ मुस्काता जब पीहर से चलती हूँ
मन मे दबे कुछ ख़्वाब सही
उलझी उलझी सी बात कहीं
कौन कहता के घर बदला बस चेहरे ही तो बदले है
सास तो अपनी माँ ही है ससुर पिता बन जाता है
जब ससुराल हो पीहर जैसा जीवन संदल हो जाता है - VAIBHAVRV
Thursday, April 26, 2018
ख़त
तुमतो कहते हो कि मोहब्बत है हमसे
है मोहब्बत तो क्यों रुला जाते हो
पास होकर भी क्यों दूर नज़र आते हो
है मोहब्बत तो बस इतना बतादो
जिसको ज़िन्दगी कहा उसको ज़िन्दगी भर के लिए अकेला छोड़ना मोहब्बत है क्या
या मोहब्बत है उसको अजनबी कहना जो तुमको अपनी हर धड़कन में पाता है
माना न होगी मुक़म्मल ये दास्तां कभी
पर ज़िंदा रहे दिल के किसी कोने में
कोई ऐसी याद तो दो -VAIBHAVRV
सज़ा
छूट गया साथ बस एक छोटी सी बात पे
रूठ गया यार बस एक छोटी सी बात पे
जिसके बिन एक पल न जी सकते थे
वो सारी उम्र अकेले जीने की सज़ा दे गए- VAIBHAVRV
इश्क़वादेवफ़ा
#इश्क़वादेवफ़ा
मोहब्बत के नाम पैग़ाम क्या भेजा
ज़माना रूठ गया
आँखों ने आँखों को जाम क्या भेजा ज़माना रूठ गया
करते रहे मोहब्बत की बाते तो ठीक था
थामने को हाथ से हाथ का फ़रमान क्या भेजा ज़माना रूठ गया -VAIBHAVRV
Wednesday, April 25, 2018
Tuesday, April 24, 2018
उस रात मैंने ये बात जानी
उस रात मैंने ये बात जानी
मैं अकेला निकला था न कोई अपना न पराया था साथ।
उस रात हो रही थी घनघोर बरसात
थे अकेले और उसपर खाली हाथ
भींगा बदन और ठंडी हवाओं का साथ
अनजान शहर और पैसे की आस
खो गयी थी नींद बुझ गयी थी प्यास
उस रात हो रही थी घनघोर बरसात
दूर किनारे दो लोग नज़र आये
जब पास आये तो वो मुस्कुराये
देख के मेरा पीला चेहरा वो भाँप गए
रुक कर देखते रहे मुझे जैसे रूह तक काँप गए
लाके मुझे दिया खुद के लिए बचाया खाना और पानी
तब उस रात मैंने ये बात जानी
“ न रंग न रूप न अमीरी न गरीबी
न किसी जात न धर्म की निशानी
जो वक़्त पर किसी के काम आए वही है ज़िन्दगानी” -VAIBHAVRV
Monday, April 23, 2018
यही तो है ज़िन्दगी जो तुम बिन अधूरी रह गयी
दीवानी
हो खुश तो झूम के घर के आंगन में घूमती है
बेवज़ह हर समय बस मेरे नाम को बोलती है
बस इसलिए तो दुनिया उसे दीवानी कहती है
कभी चूड़ी की खनक कभी पायल की छनक में
वो अपने इश्क़ का शहद घोलती है
करती है बेपनाह मोहब्बत पर लबों से कुछ न बोलती है
देख के खुशी मेरी वो अपने ग़म भूलती है
फिर उसका सवाल क्यों दुनिया मुझे दीवानी बोलती है- VAIBHAVRV
Saturday, April 21, 2018
क्या करे
ये दिल न लगे अब तुझ बिन तो क्या करे
न धड़के ये दिल तुझ बिन तो क्या करे
जितना प्यार है तुमसे वो लफ़्ज़ों में पिरोये बैठे है
तुमसे एक लफ्ज़ भी न समझा जाये तो क्या करे- VAIBHAVRV
इश्क का खेल
इश्क़ का खेल भी निराला है
कोई किसी का होजाने को पागल है
कोई दूर जा के उसकी ख़ुशियाँ मांगता है
तू आँखों में उसके लिए सपने सजाता है
ये जुदाई के अश्क़ आँखों मे छुपाता है
हज़ार तारो में अकेले चांद की तरह अकेला खुद को पाता है
किसी को उस चांद में महबूबा का अक्स नज़र आता है-VAIBHAVRV
एतबार 2
आज तेरे लबों पे ये चुप्पी क्यों है
जो कहनी थी बात वो दिल मे दबी क्यों है
डरते हो आज भी जुदाई से या अब इश्क़ पे एतबार नही- VAIBHAVRV
Friday, April 20, 2018
ऐतबार न किया
आज भी जिंदा है वो शख्स मेरे अंदर
ताउम्र जिसने टूट कर तुझे प्यार किया
छुपाये बैठे है लाख सवाल सीने के अंदर
पूछे भी कैसे पहले भी तुमने जवाब न दिया
अब सोचते है देदे जान किसी रोज़ हम भी
पर क्या हो जो तूने उसका भी ऐतबार न किया- VAIBHAVRV
दर्द-ए-दिल
न पता न खबर ज़िंदगी है किधर
ज़िंदगी है उधर आशिक़ी है जिधर
हर शाम रात में इश्क़ की बात में
इश्क़ की बात में हाथ थे हाथ में
दो कदम फिर चले चलके फिर रुक गए
जो ख़्वाब थे आंखों में वो ख़्वाब तुम बन गए
ख़्वाब तुम बन गए फिर अधूरे रह गए
अधूरे ख़्वाब बात में बस हम जी रहे
जी रहे क्या घूँट दर्द-ए-दिल पी रहे- VAIBHAVRV
ख़ामोशी
थी लफ़्ज़ों में चुप्पी कुछ ऐसे तूफाँ के पहले की खामोशी हो जैसे
ये शायद तेरे शिकवों की जीत थी या हार मेरे मोहब्बत की
मोड़ लिए थे हमने कदम जो बढ़ रहे थे तेरी ओर अरसे बाद लौटा हो सावन जैसे- VAIBHAVRV
Thursday, April 19, 2018
डर लगता है
किसी के आ जाने से भीड़ में खो जाने से
किसी से हाथ मिलाने से बस पास मेरे आ जाने से
बाजार में अब जाने को स्कूल से घर आने को
जिन हाथो में प्यार था उनमे अब खून मुझे बस दिखता है
एक दर्द सीने में उठना है हाँ माँ अब डर मुझे बहुत लगता है -VAIBHAVRV
वक़्त बितायगे
एक बार तो आओ घर मेरे संग बैठ के वक़्त बितायगे
रख के काँधे पर सर तेरे हाल-ए-दिल अपना सुनायगे
कभी बचपन की यादों में कभी जवानी के वादों में
जो छूट गए उन सपनों को एक बार फिर से सजायगे
एक बार तो आओ घर मेरे संग बैठ के वक़्त बितायग
Mohabbat
वो ढूढते रहे मेरे लफ़्ज़ों में मोहब्बत
बड़े नादान थे उनको पता ही नही के क्या है मोहब्बत
कभी होंठो की हँसी तो आँखों के अश्क़ है मोहब्बत
कभी मिलना तो कभी जुदाई है मोहब्बत
जो बसी थी नज़रो में मेरे वही तो थी मेरी मोहब्बत
वो नादान जान न सके के क्या है मोहब्बत-VAIBHAVRV
जीने की सज़ा
बड़ी बेरुखी से नज़र फेर गए तुम
बिन दिल के जीने की सज़ा दे गए तुम
वैभव प्यार आज भी उनसे
पर ये भी शब्दो मे कह न सके तुम -VAIBHAVRV
जीना
हमे तो इश्क़ ने दर्द ही दर्द दिया है
जीना तो धोखे ने सिखाया है
बेवज़ह लोग खुश होते है के उन्होंने इश्क़ किया है -VAIBHAVRV
Wednesday, April 18, 2018
ढ़ोंग
तुमको लगे बुरा जो कोई दीवाना आके उसपे प्यार को लुटाता है
चुभने लगती है तुमको वो मुस्कान जो उस पल लड़की के चेहरे पर आ जाती है
संस्कृति सम्मान और ये समाज बस आशिको को देख तुम्हें क्यों याद आता है
भूल जाते हो इज़्ज़त और सम्मान सारा तुम
जब खुद किसी लड़की के पीछे पड़ जाते हो
खीचते हो नोचते हो जब तुम उसको तो
बहन का भी प्यार तुम यार भूल जाते हो
कैसा वक़्त आया आज देश मे देखो यार
मन से जो खुद है दुश्शासन वो आज भीड़ में खड़े होके खुद का नाम कृष्ण क्यों बात ते है- VAIBHAVRV
आना तो लेते आना
आना तो लेते आना दो जाम अपनी मोहब्बत के
एक होंठो से पियेंगे एक तेरी आँखों से
आना तो लेते आना एक किताब इश्क़ की कहानी की
कुछ पढ़ेगे आँखों से कुछ तेरी इठलाती बातो से
कुछ पन्ने तेरी यादों के कुछ तेरी मेरी मुलाकातों के -VAIBHAVRV
Tuesday, April 17, 2018
हाल अपने दिल का
वो करते खुद है ख़ता इतनी और खुद ही रूठा करते है।।
आंखों में आँसू छुपाये है हम भी और वो भी
हर बात पे इश्क़ जताते थे आज शक़ से देखा करते है।
पहले हर गुनाह पे पर्दा था अब राज़ वो खोला करते है।।
छोड़ दिया था जिसने साथ कभी वो इश्क़ जताया करते है।
हम तन्हाई में हाल अपने दिल का सुनाया करते है।।-VAIBHAV RASHMI VERMA
हम क्या करे
खो बैठे है अपनी सारी खुशियाँ तेरे प्यार में
तुझे नज़र नही आता तो हम क्या करे
जाना होता है बाज़ार चंद मिनट को
तू सजने में बितादे एक घंटा तो हम क्या करे
कहती है सारी उम्र हमे प्यार न किया वैभव
हम कहे प्लाट ताज महल का ले रखा है कब से
अब तू खुद लेट करे तो हम क्या करे - VAIBHAVRV
Monday, April 16, 2018
चाह
हम क्या करेंगे तुमको पा कर
खुशी तो तुझे खोने में है
पा कर तो खोने का डर सताएगा
खो कर पाने की चाह तो रहेगी-VAIBHAVRV
Sunday, April 15, 2018
मुझे देख कर
क्यों रुक जाते हो हर बार मुझे देख कर
क्यों लिख देते हो रेत पर मेरा नाम मुझे देख कर
जब पास थे तो कुछ कहा नही तुमने कभी
अब दूर है तो बहाते हो अश्क़ मुझे देख कर-VAIBHAVRV
Saturday, April 14, 2018
शब-ए-इश्क़
शब-ए-इश्क़ में हम तो तेरे हुस्न के आफ़ताब का इंतज़ार करते है
है तुमसे मोहब्बत हमे कितनी इस बात का इज़हार करते है
है खड़े उस मोड़ पे हम आज भी देखो
तुम भी करो इज़हार बस यही फरियाद करते है-VAIBHAVRV
Friday, April 13, 2018
मिली नही है
ढूँढते रहे मोहब्बत गली बाज़ारो में वैभव
पर मोहब्बत करने वाली कोई मिली नही है
रात तारो की छांव में कर लेते याद हम भी
पर तारो भरी रात कोई मिली नही है
बता देते तुमको के कितना किया है इंतज़ार हमने
पर करते किसी का इंतज़ार ऐसी हसीन मिली नही है - VAIBHAVRV
Thursday, April 12, 2018
बेमतलब
कोई बताता नही इन अश्कों का मतलब
जो बहते है जब तेरी याद आती है
कोई बताता नही इस तन्हाई का मतलब
जो महफ़िल में भी पास आ जाती है
कोई इश्क़ तो कोई पागलपन कहता है
एक तू ही है जो दिल मे मेरे हर पल रहता है
हर चेहरे में मुझे बस तू ही तू दिखता है
कोई क्या बताएगा मेरे दिल की धड़कनों का मतलब
बस ये इश्क़ है जिसको होता है तो होता है बेमतलब-VAIBHAVRV
Ye bhi hua kabhi
Khwabon ko dekhe tu pura main karun
Lafz tere ho awaz main banu
Kahte rahe hum tujhse ye bhi hua kabhi
Tu door tha door hi raha
Sochte rahe tujhe apna banane ko
Ye bhi hua kabhi ke ab na ho phir kabhi-VAIBHAVRV
Tuesday, April 10, 2018
तेरी आदत
क्या पता तेरी आदत है या ज़रूरत जीना संग मेरे
वो तेरा थाम के हाथ बैठना साथ मेरे
वो तेरा छुपना आग़ोश में सिर रख के सीने में मेरे
जाते जाते रुकना रुक कर पलटना
अपने अश्क़ छुपा कर तेरा वो गले लगना मेरे
क्या पता तेरी आदत है या ज़रूरत बेवफ़ाई करना संग मेरे -VAIBHAVRV
धूप इश्क़ की
कैसे बताये क्या है कहानी इश्क़ की
हमने तो देखी दो तस्वीर इश्क़ की
एक लहर सावन सी इश्क़ की
एक तपती धूप इश्क़ की - VAIBHAVRV
रस्मे
रस्मे बहुत है ज़माने में बस निभानी नही आती
छुपी सौ बात दिल मे बताने को
पर बताई नही जाती- VAIBHAVRV
तन्हाईयों का साथ
जब वक्त न था मेरे पास तुम होते थे साथ
अब वक्त भी है और मैं भी बस तुम नहीं हो साथ
जब सोचा तुमको पाने का
बस मिला तन्हाईयों का साथ-VAIBHAVRV
मेरी ज़िंदगी
मिल गई नजरे जो मेरी तो खता हो गई
मर मिटे जिसपे वो बेवफा हो गई
थी जिसमे बसी मेरी ज़िंदगी हर साँस
वो न जाने कहां खो गई-VAIBHAVRV
कहाँ जी पाता हूँ
रोज तुझे पाता हूँ रोज खो जाता हूँ
चलते चलते इस सफर मे तुझसे दूर हो जाता हूँ
तू ही बता ऐ ज़िंदगी मैं तुझको कहाँ जीपाता हूँ। -VAIBHAVRV
कहाँ पढ़ा
माना न किया लफ़्ज़ों में बयां हाल-ए-दिल अपना कभी
पर तुमने भी कहाँ पढ़ा था नज़रो को मेरी - VAIBHAVRV
बाकी है
लबों पर हँसी लाना बाकी है
पलको के अश्क छुपाना बाकी है
छीन के दिल से धड़कन मेरे
कह गए अभी तो ज़िन्दगी और बाकी है-VAIBHAVRV
होश गवाएं बैठे है
हम दिल लगाए बैठे है सब होश गवाएं बैठे है।
छांव में चाँद सितारों की सौ अरमान सजाये बैठे है।।
नज़रे चुराए बैठे है हम होंठों को दबाये बैठे है।
हाँ हम पागल आशिक़ है दिल में आग जलाये बैठे है।।
हम दिल लगाए बैठे है सब होश गवाएं बैठे है। - VAIBHAVRV
Monday, April 9, 2018
आईना
दर्द अब अपना आंखों से छलकने दीजिये
बेशक़ हो बेवफ़ा दुनिया पर मोहब्बत तो कीजिये
देके खुशियां किसी अनजान को पहचान थोड़ी कीजिये
आईना बन जाएगी आँखे उसकी
बस एक बार नज़र मिलाकर इज़हार इश्क़ का कीजिये -VAIBHAVRV
बचपन
कुछ मुझ सा ही मुझमे रहता है। कौन हूँ मै बस रोज यही कहता है।।- वैभव रश्मि वर्मा
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आज ऑफिस जाते वक़्त जब घर से कार ले कर निकला ही था के कुछ दूर जाते ही कार ख़राब हो गयी। पास के गैराज में जा कर मिस्त्री को दे आया के शाम तक...
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वो तो माँ थी जो सब सह गयी। कभी खाना पसंद का न था तो कभी पहनने को कपड़े, फिर भी वो चुप थी। ऑफिस की गुस्सा उसपर चिल्ला कर निकालना भी तुम्हे सही...