Sunday, April 29, 2018

चल मोहब्बत

चल मोहब्बत से दो चार होते है
हँसी से दूर दर्द के पास होते है
खो जाते है किसी की आंखों में आज
फिर पता चले डूबते है कि पार होते है -VAIBHAVRV

परिंदा

उड़ जा रे परिंदे अब तेरा यहां न कोई
सबको खुद की चिंता है तेरी कराह सुने न कोई -VAIBHAVRV

Saturday, April 28, 2018

लकीरें

जब पढ़ी किताब मोहब्बत की हर पन्ने में अश्क़ों की लकीरें ही नज़र आई -VAIBHAVRV

Friday, April 27, 2018

बहन

संग खेलेंगे संग घूमेंगे अपनी बचपन की गलियों में

बहुत लड़ेंगे बहुत झगड़ेगे हम बचपन की गलियों में

वक़्त जो होगा पढ़ने का तो संग बैठ के पढ़ लेगे

होगी जो मुश्किल राहे संग चल के गुज़र लेगे

छोटी छोटी बात पे माँ हम अपनी बहन से हारेंगे

जो होगी उसके चेहरे पे हँसी हम जान भी अपनी वारेगें

जो होगी तकलीफ कही पर उसकी ढाल बन जायगे

बचपन की ये सारी बाते दर्द बड़ा दे जाती है

जब रातो को रोज़ किसी की बहन कही खो जाती है -VAIBHAVRV

ज़िन्दगी

अब न पता न कुछ खबर
किस मोड़ पर रुक जायगे ये कदम
क्या ज़िन्दगी क्या मौत कहा तक चलेंगे वो साथ हमारे -VAIBHAVRV

मेहंदी

इस मेंहदी के रंग की बात निराली लगती है

सारा जीवन महका देती जब नाम पिया के लगती है

खिलती हूँ चहकती हूँ जब कुमकुम बिंदिया से सजती हूँ

दिल घबराता कुछ मुस्काता जब पीहर से चलती हूँ

मन मे दबे कुछ ख़्वाब सही

उलझी उलझी सी बात कहीं

कौन कहता के घर बदला बस चेहरे ही तो बदले है

सास तो अपनी माँ ही है ससुर पिता बन जाता है

जब ससुराल हो पीहर जैसा जीवन संदल हो जाता है - VAIBHAVRV

Thursday, April 26, 2018

ख़त

तुमतो कहते हो कि मोहब्बत है हमसे

है मोहब्बत तो क्यों रुला जाते हो

पास होकर भी क्यों दूर नज़र आते हो

है मोहब्बत तो बस इतना बतादो

जिसको ज़िन्दगी कहा उसको ज़िन्दगी भर के लिए अकेला छोड़ना मोहब्बत है क्या

या मोहब्बत है उसको अजनबी कहना जो तुमको अपनी हर धड़कन में पाता है

माना न होगी मुक़म्मल ये दास्तां कभी

पर ज़िंदा रहे दिल के किसी कोने में

कोई ऐसी याद तो दो -VAIBHAVRV

सज़ा

छूट गया साथ बस एक छोटी सी बात पे

रूठ गया यार बस एक छोटी सी बात पे

जिसके बिन एक पल न जी सकते थे

वो सारी उम्र अकेले जीने की सज़ा दे गए- VAIBHAVRV

इश्क़वादेवफ़ा

#इश्क़वादेवफ़ा

मोहब्बत के नाम पैग़ाम क्या भेजा
ज़माना रूठ गया
आँखों ने आँखों को जाम क्या भेजा ज़माना रूठ गया
करते रहे मोहब्बत की बाते तो ठीक था
थामने को हाथ से हाथ का फ़रमान क्या भेजा ज़माना रूठ गया -VAIBHAVRV

Wednesday, April 25, 2018

मेरी डायरी

मैं वो नही जिससे तू नफ़रत करती है
मैं तो वो हूँ जिससे तूने कभी प्यार किया था-VAIBHAVRV

Tuesday, April 24, 2018

धूप

दोष धूप को देते रहे
लेके जिस्म मोम का बैठे थे तपते पत्थरो पर -VAIBHAVRV

उस रात मैंने ये बात जानी

उस रात मैंने ये बात जानी

मैं अकेला निकला था न कोई अपना न पराया था साथ।

उस रात हो रही थी घनघोर बरसात

थे अकेले और उसपर खाली हाथ

भींगा बदन और ठंडी हवाओं का साथ

अनजान शहर और पैसे की आस

खो गयी थी नींद बुझ गयी थी प्यास

उस रात हो रही थी घनघोर बरसात

दूर किनारे दो लोग नज़र आये

जब पास आये तो वो मुस्कुराये

देख के मेरा पीला चेहरा वो भाँप गए

रुक कर देखते रहे मुझे जैसे रूह तक काँप गए

लाके मुझे दिया खुद के लिए बचाया खाना और पानी

तब उस रात मैंने ये बात जानी

“ न रंग न रूप न अमीरी न गरीबी

न किसी जात न धर्म की निशानी

जो वक़्त पर किसी के काम आए वही है ज़िन्दगानी” -VAIBHAVRV

Monday, April 23, 2018

यही तो है ज़िन्दगी जो तुम बिन अधूरी रह गयी

यही तो है ज़िन्दगी जो तुम बिन अधूरी रह गयी
वो बात जो होंठो में दबी रह गयी
न कही न सुनी न कभी शब्दो मे लिख पाए हम
जो तुम्हारे साथ सुरों सी सजी वो तुम बिन गूंगी आवाज हो गयी
जो कभी बारिश की बूंदों सी गीली थी आज रेत सी चुभने लगी
तो तन्हाई में हँसाती थी आज महफ़िल में भी रुला गयी
यही तो है ज़िन्दगी जो तुम बिन अधूरी रह गयी -VAIBHAVRV

दीवानी

हो खुश तो झूम के घर के आंगन में घूमती है
बेवज़ह हर समय बस मेरे नाम को बोलती है
बस इसलिए तो दुनिया उसे दीवानी कहती है
कभी चूड़ी की खनक कभी पायल की छनक में
वो अपने इश्क़ का शहद घोलती है
करती है बेपनाह मोहब्बत पर लबों से कुछ न बोलती है
देख के खुशी मेरी वो अपने ग़म भूलती है
फिर उसका सवाल क्यों दुनिया मुझे दीवानी बोलती है- VAIBHAVRV

Saturday, April 21, 2018

क्या करे

ये दिल न लगे अब तुझ  बिन तो क्या करे
न धड़के ये दिल तुझ बिन तो क्या करे
जितना प्यार है तुमसे वो लफ़्ज़ों में पिरोये बैठे है
तुमसे एक लफ्ज़ भी न समझा जाये तो क्या करे- VAIBHAVRV

इश्क का खेल

इश्क़ का खेल भी निराला है
कोई किसी का होजाने को पागल है
कोई दूर जा के उसकी ख़ुशियाँ मांगता है
तू आँखों में उसके लिए सपने सजाता है
ये जुदाई के अश्क़ आँखों मे छुपाता है
हज़ार तारो में अकेले चांद की तरह अकेला खुद को पाता है
किसी को उस चांद में महबूबा का अक्स नज़र आता है-VAIBHAVRV

एतबार 2

आज तेरे लबों पे ये चुप्पी क्यों है

जो कहनी थी बात वो दिल मे दबी क्यों है

डरते हो आज भी जुदाई से या अब इश्क़ पे एतबार नही- VAIBHAVRV

Friday, April 20, 2018

ऐतबार न किया


आज भी जिंदा है वो शख्स मेरे अंदर
ताउम्र जिसने टूट कर तुझे प्यार किया
छुपाये बैठे है लाख सवाल सीने के अंदर
पूछे भी कैसे पहले भी तुमने जवाब न दिया
अब सोचते है देदे जान किसी रोज़ हम भी
पर क्या हो जो तूने उसका भी ऐतबार न किया- VAIBHAVRV

दर्द-ए-दिल

न पता न खबर ज़िंदगी है किधर

ज़िंदगी है उधर आशिक़ी है जिधर

हर शाम रात में इश्क़ की बात में

इश्क़ की बात में हाथ थे हाथ में

दो कदम फिर चले चलके फिर रुक गए

जो ख़्वाब थे आंखों में वो ख़्वाब तुम बन गए

ख़्वाब तुम बन गए फिर अधूरे रह गए

अधूरे ख़्वाब बात में बस हम जी रहे

जी रहे क्या घूँट दर्द-ए-दिल पी रहे- VAIBHAVRV

ख़ामोशी

थी लफ़्ज़ों में चुप्पी कुछ ऐसे तूफाँ के पहले की खामोशी हो जैसे

ये शायद तेरे शिकवों की जीत थी या हार मेरे मोहब्बत की

मोड़ लिए थे हमने कदम जो बढ़ रहे थे तेरी ओर अरसे बाद लौटा हो सावन जैसे- VAIBHAVRV

Thursday, April 19, 2018

अश्क़

हरपल यादों में तेरी हम रह गए
आंखों से सपने अश्क़ बनके बह गए -VAIBHAVRV

डर लगता है

किसी के आ जाने से भीड़ में खो जाने से
किसी से हाथ मिलाने से बस पास मेरे आ जाने से
बाजार में अब जाने को स्कूल से घर आने को
जिन हाथो में प्यार था उनमे अब खून मुझे बस दिखता है
एक दर्द सीने में उठना है हाँ माँ अब डर मुझे बहुत लगता है -VAIBHAVRV

वक़्त बितायगे

एक बार तो आओ घर मेरे संग बैठ के वक़्त बितायगे

रख के काँधे पर सर तेरे हाल-ए-दिल अपना सुनायगे

कभी बचपन की यादों में कभी जवानी के वादों में

जो छूट गए उन सपनों को एक बार फिर से सजायगे

एक बार तो आओ घर मेरे संग बैठ के वक़्त बितायग

Mohabbat

वो ढूढते रहे मेरे लफ़्ज़ों में मोहब्बत

बड़े नादान थे उनको पता ही नही के क्या है मोहब्बत

कभी होंठो की हँसी तो आँखों के अश्क़ है मोहब्बत

कभी मिलना तो कभी जुदाई है मोहब्बत

जो बसी थी नज़रो में मेरे वही तो थी मेरी मोहब्बत

वो नादान जान न सके के क्या है मोहब्बत-VAIBHAVRV

जीने की सज़ा

बड़ी बेरुखी से नज़र फेर गए तुम
बिन दिल के जीने की सज़ा दे गए तुम
वैभव प्यार आज भी उनसे
पर ये भी शब्दो मे कह न सके तुम   -VAIBHAVRV

कागज

यूँ ही दर्द कागज पर उतारा करो
जो न हुए पूरे कभी उन सपनों को लफ़्ज़ों से पूरा करो- VAIBHAVRV

बात इश्क़ की

बात इश्क़ की लफ़्ज़ों का इंतज़ार कहा करती है ये तो आंखों से अश्क़ बनके बहती है-VAIBHAVRV

जीना

हमे तो इश्क़ ने दर्द ही दर्द दिया है
जीना तो धोखे ने सिखाया है
बेवज़ह लोग खुश होते है के उन्होंने इश्क़ किया है -VAIBHAVRV

Wednesday, April 18, 2018

ढ़ोंग

तुमको लगे बुरा जो कोई दीवाना आके उसपे प्यार को लुटाता है

चुभने लगती है  तुमको वो मुस्कान जो उस पल लड़की के चेहरे पर आ जाती है

संस्कृति सम्मान और ये समाज बस आशिको को देख तुम्हें क्यों याद आता है

भूल जाते हो इज़्ज़त और सम्मान सारा तुम

जब खुद किसी लड़की के पीछे पड़ जाते हो

खीचते हो नोचते हो जब तुम उसको तो

बहन का भी प्यार तुम यार भूल जाते हो

कैसा वक़्त आया आज देश मे देखो यार

मन से जो खुद है दुश्शासन वो आज भीड़ में खड़े होके खुद का नाम कृष्ण क्यों बात ते है- VAIBHAVRV

आना तो लेते आना

आना तो लेते आना दो जाम अपनी मोहब्बत के
एक होंठो से पियेंगे एक तेरी आँखों से
आना तो लेते आना एक किताब इश्क़ की कहानी की
कुछ पढ़ेगे आँखों से कुछ तेरी इठलाती बातो से
कुछ पन्ने तेरी यादों के कुछ तेरी मेरी मुलाकातों के -VAIBHAVRV

Tuesday, April 17, 2018

हाल अपने दिल का

हम तन्हाई में हाल अपने दिल का सुनाया करते है।
वो करते खुद है ख़ता इतनी और खुद ही रूठा करते है।।
आंखों में आँसू छुपाये है हम भी और वो भी
हर बात पे इश्क़ जताते थे आज शक़ से देखा करते है।
पहले हर गुनाह पे पर्दा था अब राज़ वो खोला करते है।।
छोड़ दिया था जिसने साथ कभी वो इश्क़ जताया करते है।
हम तन्हाई में हाल अपने दिल का सुनाया करते है।।-VAIBHAV RASHMI VERMA

हम क्या करे

खो बैठे है अपनी सारी खुशियाँ तेरे प्यार में

तुझे नज़र नही आता तो हम क्या करे

जाना होता है बाज़ार चंद मिनट को

तू सजने में बितादे एक घंटा तो हम क्या करे

कहती है सारी उम्र हमे प्यार न किया वैभव

हम कहे प्लाट ताज महल का ले रखा है कब से

अब तू खुद लेट करे तो हम क्या करे - VAIBHAVRV

Monday, April 16, 2018

चाह

हम क्या करेंगे तुमको पा कर

खुशी तो तुझे खोने में है

पा कर तो खोने का डर सताएगा

खो कर पाने की चाह तो रहेगी-VAIBHAVRV

Sunday, April 15, 2018

मुझे देख कर

क्यों रुक जाते हो हर बार मुझे देख कर

क्यों लिख देते हो रेत पर मेरा नाम मुझे देख कर

जब पास थे तो कुछ कहा नही तुमने कभी

अब दूर है तो बहाते हो अश्क़ मुझे देख कर-VAIBHAVRV

Saturday, April 14, 2018

शब-ए-इश्क़

शब-ए-इश्क़ में हम तो तेरे हुस्न के आफ़ताब का इंतज़ार करते है

है तुमसे मोहब्बत हमे कितनी इस बात का इज़हार करते है

है खड़े उस मोड़ पे हम आज भी देखो

तुम भी करो इज़हार बस यही फरियाद करते है-VAIBHAVRV

Friday, April 13, 2018

मिली नही है

ढूँढते रहे मोहब्बत गली बाज़ारो में वैभव
पर मोहब्बत करने वाली कोई मिली नही है
रात तारो की छांव में कर लेते याद हम भी
पर तारो भरी रात कोई मिली नही है
बता देते तुमको के कितना किया है इंतज़ार हमने
पर करते किसी का इंतज़ार ऐसी हसीन मिली नही है - VAIBHAVRV

Thursday, April 12, 2018

बेमतलब

कोई बताता नही इन अश्कों का मतलब

जो बहते है जब तेरी याद आती है  

कोई बताता नही इस तन्हाई का मतलब

जो महफ़िल में भी पास आ जाती है

कोई इश्क़ तो कोई पागलपन कहता है

एक तू ही है जो दिल मे मेरे हर पल रहता है

हर चेहरे में मुझे बस तू ही तू दिखता है

कोई क्या बताएगा मेरे दिल की धड़कनों का मतलब

बस ये इश्क़ है जिसको होता है तो होता है बेमतलब-VAIBHAVRV

Ye bhi hua kabhi

Khwabon ko dekhe tu pura main karun

Lafz tere ho awaz main banu

Kahte rahe hum tujhse ye bhi hua kabhi

Tu door tha door hi raha

Sochte rahe tujhe apna banane ko

Ye bhi hua kabhi ke ab na ho phir kabhi-VAIBHAVRV

Tuesday, April 10, 2018

तेरी आदत

क्या पता तेरी आदत है या ज़रूरत जीना संग मेरे
वो तेरा थाम के हाथ बैठना साथ मेरे
वो तेरा छुपना आग़ोश में सिर रख के सीने में मेरे
जाते जाते रुकना रुक कर पलटना
अपने अश्क़ छुपा कर तेरा वो गले लगना मेरे
क्या पता तेरी आदत है या ज़रूरत बेवफ़ाई करना संग  मेरे -VAIBHAVRV

धूप इश्क़ की

कैसे बताये क्या है कहानी  इश्क़ की
हमने तो देखी दो तस्वीर इश्क़ की
एक लहर सावन सी इश्क़ की
एक तपती धूप इश्क़ की - VAIBHAVRV

रस्मे

रस्मे बहुत है ज़माने में बस निभानी नही आती
छुपी सौ बात दिल मे बताने को
पर बताई नही जाती- VAIBHAVRV

तन्हाईयों का साथ

जब वक्त न था मेरे पास तुम होते थे साथ
अब वक्त भी है और मैं भी बस तुम नहीं हो साथ
जब सोचा तुमको पाने का
बस मिला तन्हाईयों का साथ-VAIBHAVRV

मेरी ज़िंदगी

मिल गई नजरे जो मेरी तो खता हो गई
मर मिटे जिसपे वो बेवफा हो गई
थी जिसमे बसी मेरी ज़िंदगी हर साँस
वो न  जाने कहां खो गई-VAIBHAVRV

कहाँ जी पाता  हूँ

रोज तुझे पाता हूँ रोज खो जाता हूँ
चलते चलते इस सफर मे तुझसे दूर हो जाता हूँ
तू ही बता ऐ ज़िंदगी मैं तुझको कहाँ जीपाता  हूँ। -VAIBHAVRV

कहाँ पढ़ा

माना न किया लफ़्ज़ों में बयां हाल-ए-दिल अपना कभी

पर तुमने भी कहाँ पढ़ा था नज़रो को मेरी  - VAIBHAVRV

अक्स

जब उठाया आईना खुद को देखने को

अक्स तेरा ही नज़र आया हमे -VAIBHAVRV

बाकी है

लबों पर हँसी लाना बाकी है
पलको के अश्क छुपाना बाकी है
छीन के दिल से धड़कन मेरे
कह गए अभी तो ज़िन्दगी और बाकी है-VAIBHAVRV

होश गवाएं बैठे है

हम दिल लगाए बैठे है सब होश गवाएं बैठे है।
छांव में  चाँद सितारों की सौ अरमान सजाये बैठे है।।
नज़रे चुराए बैठे है हम होंठों को दबाये बैठे है।
हाँ हम पागल आशिक़ है दिल में आग जलाये बैठे है।।
हम दिल लगाए बैठे है सब होश गवाएं बैठे है। - VAIBHAVRV

इंतज़ार

वो ढूंढते रहे लफ़्ज़ों में फ़साना मोहब्बत का

और हम नज़रे मिलने का इंतज़ार ही करते रहे -VAIBHAVRV

Monday, April 9, 2018

आईना

दर्द अब अपना आंखों से छलकने दीजिये
बेशक़ हो बेवफ़ा दुनिया पर मोहब्बत तो कीजिये
देके खुशियां किसी अनजान को पहचान थोड़ी कीजिये
आईना बन जाएगी आँखे उसकी
बस एक बार नज़र मिलाकर इज़हार इश्क़ का कीजिये -VAIBHAVRV

बचपन

देख के तुम्हे बचपन मे खोना चाहते है
हम जी भर के बारिश में भींगना चाहते है
जो छोड़ दी थी गलियां कभी हमने
अब उन गलियों में खो जाना चाहते है
हाथो में टूटे गुलाब के फूल
कपड़ो पे लगी गीली माटी
थक चुके है इस भाग दौड़ से हम
अब तो फिर बचपन मे लौट जाने को जी चाहता है -VAIBHAVRV

चेहरा

नफरत नही है तुझसे जो चेहरा फेर लेते है
बस तेरे चेहरे पर फ़रेब की चादर पसंद नही - VAIBHAVRV

मेरे लफ़्ज़ों से



जब उठाया आईना खुद को देखने को
अक्स तेरा ही नज़र आया हमे -VAIBHAVRV

 कुछ मुझ सा ही मुझमे रहता है। कौन हूँ मै बस रोज यही कहता है।।- वैभव रश्मि वर्मा