Thursday, April 26, 2018

ख़त

तुमतो कहते हो कि मोहब्बत है हमसे

है मोहब्बत तो क्यों रुला जाते हो

पास होकर भी क्यों दूर नज़र आते हो

है मोहब्बत तो बस इतना बतादो

जिसको ज़िन्दगी कहा उसको ज़िन्दगी भर के लिए अकेला छोड़ना मोहब्बत है क्या

या मोहब्बत है उसको अजनबी कहना जो तुमको अपनी हर धड़कन में पाता है

माना न होगी मुक़म्मल ये दास्तां कभी

पर ज़िंदा रहे दिल के किसी कोने में

कोई ऐसी याद तो दो -VAIBHAVRV

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 कुछ मुझ सा ही मुझमे रहता है। कौन हूँ मै बस रोज यही कहता है।।- वैभव रश्मि वर्मा