तुमतो कहते हो कि मोहब्बत है हमसे
है मोहब्बत तो क्यों रुला जाते हो
पास होकर भी क्यों दूर नज़र आते हो
है मोहब्बत तो बस इतना बतादो
जिसको ज़िन्दगी कहा उसको ज़िन्दगी भर के लिए अकेला छोड़ना मोहब्बत है क्या
या मोहब्बत है उसको अजनबी कहना जो तुमको अपनी हर धड़कन में पाता है
माना न होगी मुक़म्मल ये दास्तां कभी
पर ज़िंदा रहे दिल के किसी कोने में
कोई ऐसी याद तो दो -VAIBHAVRV
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