Sunday, October 31, 2021

कितने ज़ख़्मो को दिल मे छिपाया है तुमने।
फिर से किसी को मोहब्बत बनाया है तुमने।।

वो था न मोहब्बत के क़ाबिल कभी, फिर भी काट दी इंतज़ार में कितनी रातें तुमने।
अब आईने को गौर से देखो ज़रा,
क्या फिर सुनी माँग को सजाया है तुमने।।

कितने दामन थामे कितने साथ छोड़ गए।
तब भी तो तन्हा थे अब भी तन्हा रह गए।।

न बारिश आंखों की रुकी न प्यास लबों की मिटती है।
तमाशा ही है जिंदगी का पिस कर ही मेहंदी रचती है।।


काश के कह पाता के सब ठीक है।
ये तो जिंदगी है कभी तीखी कभी मीठी हो ही जाती है।।

बस ये तो आंखे है जो हाल-ए-दिल बता देती है।
वरना अब ज़ुबां कहाँ कुछ कह पाती है।।-वैभव रश्मि वर्मा 
©merelafzonse

Wednesday, October 13, 2021

मुलाकातें

1.अभी इश्क़ की कई मुलाक़ात बाक़ी है।
तरसते इन होंठो की एक रात बाक़ी है।।

वो जो तन्हाई में काटी थी तुमने।
होने को वो सारी बातें बाक़ी है।।

देखो इन आँखों मे नमी रहती थी ग़म की।
तेरे होने से जाना जीने की आस बाक़ी है।।


2.कितनी रातें काटनी है तुम बिन तुम्ही बताओ न।
ज़ख्म ले सीने में कैसे मुस्कुराएं तुम्ही बताओ न।।

देखो न कि आज तन्हा अकेला हूँ हज़ारो में ऐसे।
दिल है जो ग़म-ए- दरिया तो क्या गुनगुनाऊँ मैं।।

तुम्हारी चूड़ियों की खनक से लबों पे मुस्कान होती थी।
अब तो पत्तो की सरसराहट भी चुभने लगी है।।

कितनी रातें काटनी है तुम बिन तुम्ही बताओ न।
ज़ख्म ले सीने में कैसे मुस्कुराएं तुम्ही बताओ न।।-वैभव रश्मि वर्मा

अधूरे ख़्वाब

1.ज़िंदगी थोड़ी खुशनुमा हो जाती जो तुम साथ होती।
कि देखो अब आँखों की नमी जाती ही नही जो तुम साथ नही।।
अब तो तन्हाइयां अक़्सर रुला जाती है।
हाँ जब ये फ़ैली बाहें बिन तुम्हारे सिमट जाती है।।
कैसे बताएं कि इश्क़ तो आज भी उतना ही है।
बस तुम्हारे रूठ जाने का डर कुछ कहने नही देता।।



2. कितने ज़ख़्मो को दिल मे छिपाया है तुमने।
फिर से किसी को मोहब्बत बनाया है तुमने।।

वो था न मोहब्बत के क़ाबिल कभी, 
फिर भी काट दी इंतज़ार में कितनी रातें तुमने।
अब आईने को गौर से देखो ज़रा,
क्या फिर सुनी माँग को सजाया है तुमने।।-वैभव रश्मि वर्मा


 कुछ मुझ सा ही मुझमे रहता है। कौन हूँ मै बस रोज यही कहता है।।- वैभव रश्मि वर्मा