Thursday, July 15, 2021

मरुधर

मैं ख़तों में क्या लिखूँ मेरा हाल तुम जानते हो।
दिल को मेरे तुम मरुधर, आँखों को बादल मानते हो।

हर बात मेरी है तुम्ही से, खत्म तुम पर ही हो रही है।
छोड़ तन्हा आज मुझको, तुम क्यों जानम रो रही हो।-वैभव रश्मि वर्मा

Monday, July 12, 2021

सब्जी वाला

सिर पर वो ज़िम्मेदारी धर कर, दौड़ रहा तरकारी भर कर।

धूप में अपनी वो आँखों को मीचे, देखो दौड़ रहा है पीछे पीछे।।

बच्चे भूखे है कुछ लेलो भाई, दो दिन से न हुई कमाई।

मोल भाव मत करो भाई, सिर्फ दो पैसे की ही है कमाई।।

बीच बाजार हुई हाथापाई, छीन गयी दिनभर की कमाई।

घर पहुँचा वो जैसे तैसे, जेब मे बचे न थे उसके पैसे।।

बच्चों को खिला कर वो खाना, सो गया भूखा कर के बहाना।

कल फिर है जल्दी से उठना, दिन भर फिर है धूप में तपना।।-वैभव रश्मि वर्मा

अभी खामोश है समंदर तो चलो पार कर लो।


आएगा तूफां तो कश्ती निकाल न पाओगे।।


न कर इश्क़ की तासीर तीखी है।


मिल गए जो लब तो प्यास बुझा न पाओगे।।


बैठे थे कभी रख सिर जिसके काँधे पर तुम अपना।


उसी का छोड़ कर तुम हाथ सरे बाज़ार हो आये।। -वैभव रश्मि वर्मा

Friday, July 9, 2021

समय

रचना - समय
लेखक- त्रिशा सिंह

क्या लिखूँ


रचना - क्या लिखूँ
लेखक - लच्छा पराठा

 कुछ मुझ सा ही मुझमे रहता है। कौन हूँ मै बस रोज यही कहता है।।- वैभव रश्मि वर्मा