Monday, July 12, 2021

अभी खामोश है समंदर तो चलो पार कर लो।


आएगा तूफां तो कश्ती निकाल न पाओगे।।


न कर इश्क़ की तासीर तीखी है।


मिल गए जो लब तो प्यास बुझा न पाओगे।।


बैठे थे कभी रख सिर जिसके काँधे पर तुम अपना।


उसी का छोड़ कर तुम हाथ सरे बाज़ार हो आये।। -वैभव रश्मि वर्मा

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 कुछ मुझ सा ही मुझमे रहता है। कौन हूँ मै बस रोज यही कहता है।।- वैभव रश्मि वर्मा