हिंदी शायरी, हिंदी कहानी, स्वरचित रचना
अभी खामोश है समंदर तो चलो पार कर लो।
आएगा तूफां तो कश्ती निकाल न पाओगे।।
न कर इश्क़ की तासीर तीखी है।
मिल गए जो लब तो प्यास बुझा न पाओगे।।
बैठे थे कभी रख सिर जिसके काँधे पर तुम अपना।
उसी का छोड़ कर तुम हाथ सरे बाज़ार हो आये।। -वैभव रश्मि वर्मा
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कुछ मुझ सा ही मुझमे रहता है। कौन हूँ मै बस रोज यही कहता है।।- वैभव रश्मि वर्मा
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