कब देखा है तुमने?
मेरी रुकती चलती साँसों को, ख़ामोशी में बहती इन आँखों को।
हर बार हर शायरी में आते तुम्हारे नाम को।।
कब देखा है तुमने?
मेरे पर्स में रखी तुम्हारी फ़ोटो को, मेरी किताब में रखे तुम्हारे नाम के गुलाब को।
तुम्हारे ख़्वाबों में जीते मेरे ख़्वाब को, तुम्हारे लिए मेरे दिल के एहसास को।।
कब देखा है तुमने?-VAIBHAV RASHMI VERMA
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