Wednesday, October 13, 2021

मुलाकातें

1.अभी इश्क़ की कई मुलाक़ात बाक़ी है।
तरसते इन होंठो की एक रात बाक़ी है।।

वो जो तन्हाई में काटी थी तुमने।
होने को वो सारी बातें बाक़ी है।।

देखो इन आँखों मे नमी रहती थी ग़म की।
तेरे होने से जाना जीने की आस बाक़ी है।।


2.कितनी रातें काटनी है तुम बिन तुम्ही बताओ न।
ज़ख्म ले सीने में कैसे मुस्कुराएं तुम्ही बताओ न।।

देखो न कि आज तन्हा अकेला हूँ हज़ारो में ऐसे।
दिल है जो ग़म-ए- दरिया तो क्या गुनगुनाऊँ मैं।।

तुम्हारी चूड़ियों की खनक से लबों पे मुस्कान होती थी।
अब तो पत्तो की सरसराहट भी चुभने लगी है।।

कितनी रातें काटनी है तुम बिन तुम्ही बताओ न।
ज़ख्म ले सीने में कैसे मुस्कुराएं तुम्ही बताओ न।।-वैभव रश्मि वर्मा

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 कुछ मुझ सा ही मुझमे रहता है। कौन हूँ मै बस रोज यही कहता है।।- वैभव रश्मि वर्मा