Thursday, April 19, 2018

वक़्त बितायगे

एक बार तो आओ घर मेरे संग बैठ के वक़्त बितायगे

रख के काँधे पर सर तेरे हाल-ए-दिल अपना सुनायगे

कभी बचपन की यादों में कभी जवानी के वादों में

जो छूट गए उन सपनों को एक बार फिर से सजायगे

एक बार तो आओ घर मेरे संग बैठ के वक़्त बितायग

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 कुछ मुझ सा ही मुझमे रहता है। कौन हूँ मै बस रोज यही कहता है।।- वैभव रश्मि वर्मा