हिंदी शायरी, हिंदी कहानी, स्वरचित रचना
एक बार तो आओ घर मेरे संग बैठ के वक़्त बितायगे
रख के काँधे पर सर तेरे हाल-ए-दिल अपना सुनायगे
कभी बचपन की यादों में कभी जवानी के वादों में
जो छूट गए उन सपनों को एक बार फिर से सजायगे
एक बार तो आओ घर मेरे संग बैठ के वक़्त बितायग
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कुछ मुझ सा ही मुझमे रहता है। कौन हूँ मै बस रोज यही कहता है।।- वैभव रश्मि वर्मा
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