देख के तुम्हे बचपन मे खोना चाहते है
हम जी भर के बारिश में भींगना चाहते है
जो छोड़ दी थी गलियां कभी हमने
अब उन गलियों में खो जाना चाहते है
हाथो में टूटे गुलाब के फूल
कपड़ो पे लगी गीली माटी
थक चुके है इस भाग दौड़ से हम
अब तो फिर बचपन मे लौट जाने को जी चाहता है -VAIBHAVRV
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