हिंदी शायरी, हिंदी कहानी, स्वरचित रचना
बात इश्क़ की लफ़्ज़ों का इंतज़ार कहा करती है ये तो आंखों से अश्क़ बनके बहती है-VAIBHAVRV
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कुछ मुझ सा ही मुझमे रहता है। कौन हूँ मै बस रोज यही कहता है।।- वैभव रश्मि वर्मा
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