हिंदी शायरी, हिंदी कहानी, स्वरचित रचना
थी लफ़्ज़ों में चुप्पी कुछ ऐसे तूफाँ के पहले की खामोशी हो जैसे
ये शायद तेरे शिकवों की जीत थी या हार मेरे मोहब्बत की
मोड़ लिए थे हमने कदम जो बढ़ रहे थे तेरी ओर अरसे बाद लौटा हो सावन जैसे- VAIBHAVRV
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कुछ मुझ सा ही मुझमे रहता है। कौन हूँ मै बस रोज यही कहता है।।- वैभव रश्मि वर्मा
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