Saturday, April 28, 2018

लकीरें

जब पढ़ी किताब मोहब्बत की हर पन्ने में अश्क़ों की लकीरें ही नज़र आई -VAIBHAVRV

No comments:

 कुछ मुझ सा ही मुझमे रहता है। कौन हूँ मै बस रोज यही कहता है।।- वैभव रश्मि वर्मा