Friday, April 27, 2018

बहन

संग खेलेंगे संग घूमेंगे अपनी बचपन की गलियों में

बहुत लड़ेंगे बहुत झगड़ेगे हम बचपन की गलियों में

वक़्त जो होगा पढ़ने का तो संग बैठ के पढ़ लेगे

होगी जो मुश्किल राहे संग चल के गुज़र लेगे

छोटी छोटी बात पे माँ हम अपनी बहन से हारेंगे

जो होगी उसके चेहरे पे हँसी हम जान भी अपनी वारेगें

जो होगी तकलीफ कही पर उसकी ढाल बन जायगे

बचपन की ये सारी बाते दर्द बड़ा दे जाती है

जब रातो को रोज़ किसी की बहन कही खो जाती है -VAIBHAVRV

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 कुछ मुझ सा ही मुझमे रहता है। कौन हूँ मै बस रोज यही कहता है।।- वैभव रश्मि वर्मा