हिंदी शायरी, हिंदी कहानी, स्वरचित रचना
आज तेरे लबों पे ये चुप्पी क्यों है
जो कहनी थी बात वो दिल मे दबी क्यों है
डरते हो आज भी जुदाई से या अब इश्क़ पे एतबार नही- VAIBHAVRV
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कुछ मुझ सा ही मुझमे रहता है। कौन हूँ मै बस रोज यही कहता है।।- वैभव रश्मि वर्मा
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