Tuesday, January 1, 2019

एक तारा


मैंने देखा था एक तारे को आसमां में खोते हुए
दिन के उजाले में भी रोते हुए।
कोई होता जो पूछता हाल उसका
आखिर क्यों दिखता है अक़्सर आँसुओ की माला पिरोते हुए।।-VAIBHAVRV

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 कुछ मुझ सा ही मुझमे रहता है। कौन हूँ मै बस रोज यही कहता है।।- वैभव रश्मि वर्मा