हिंदी शायरी, हिंदी कहानी, स्वरचित रचना
मैंने देखा था एक तारे को आसमां में खोते हुए दिन के उजाले में भी रोते हुए। कोई होता जो पूछता हाल उसका आखिर क्यों दिखता है अक़्सर आँसुओ की माला पिरोते हुए।।-VAIBHAVRV
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