हिंदी शायरी, हिंदी कहानी, स्वरचित रचना
हर शब महफ़िल तेरी यादों की लगाते है साथ तेरे गुज़रे लम्हो को बुलाते है न हो रुस्वा तेरा इश्क़ कभी महफ़िल में इसलिए मरीज़-ए-इश्क़ बनाने का इल्ज़ाम सब पर लगाते है -VAIBHAVRV
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