Thursday, December 27, 2018

महफ़िल

हर शब महफ़िल तेरी यादों की लगाते है
साथ तेरे गुज़रे लम्हो को बुलाते है
न हो रुस्वा तेरा इश्क़ कभी महफ़िल में
इसलिए मरीज़-ए-इश्क़ बनाने का इल्ज़ाम सब पर लगाते है -VAIBHAVRV

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 कुछ मुझ सा ही मुझमे रहता है। कौन हूँ मै बस रोज यही कहता है।।- वैभव रश्मि वर्मा