Monday, August 12, 2019

हिंदी ज्ञानशिला 12/08/2019 सच्चिदानन्‍द हीरानन्‍द वात्‍स्‍यायन 'अज्ञेय'

पं. सच्चिदानन्‍द हीरानन्‍द वात्‍स्‍यायन 'अज्ञेय' का जन्‍म सन् 1911 र्इ्र. में लाहौर के करतापुर नामक ग्राम में हुआ था। इनके पिता का नाम पं. हीरानन्‍द शास्‍त्री सुप्रसिद्ध पुरातत्‍ववेत्ता थे। पिता का बार-बार स्‍थानान्‍तरण होने के कारण 'अज्ञेय' जी की प्रारम्भिक शिक्षा घर पर ही हुई। इन्‍होंने फारसी और अँग्रेजी का अध्‍ययन घर पर ही किया । मद्रास और लाहौर से इन्‍होंने उच्‍च शिक्षा प्राप्‍त की। विज्ञान सनातक होने के बाद जब वे एम.ए. कर रहे थे तभी क्रान्तिकारी षड्यन्‍त्रों में भाग लेने के कारण गिरफ्तार कर लिए गए ओर सन् 1930 से 1934 ई. तक कारागार में रहे। बाद में एक वर्ष इन्‍हें घर में ही नजरबन्‍द रहना पड़ा। सन् 1943-1946 ई. में इनहोंने सेना में भर्ती होकर असम-बर्मा सीमा पर और युद्ध समाप्‍त हो जाने पर पंजाब-पश्चिमोत्तर सीमा पर एक सैनिक के रूप में सेवा की। सन् 1955 ई. में वे यूनेस्‍कों की वृत्ति प्राप्‍त कर यूरोप चले गये। सन् 1943 ई. में 'तार-सप्‍तक' का प्रकाशन करके हिन्‍दी विता में नवीन आन्‍दोलन चलाया। इनके उपन्‍यास ओर कहानियॉं उच्‍च कोटि की है। पत्रकार के रूप में इनहें पर्याप्‍त सम्‍मान मिला । 4 अप्रैल 1987 ई. को इनका देहान्‍त हो गया। वे प्रयोगवाद के प्रवर्त्तक तथा समर्थ साहित्‍यकार थे। वे बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे। इनकी प्रतिभा गद्य-क्षेत्र में नवीन प्रयोगों में दिखायी देती है।

कृतियाँ-
'कविता संग्रह:-भग्नदूत 1933, चिन्ता 1942,इत्यलम्1946,हरी घास पर क्षण भर 1949, बावरा अहेरी 1954,इन्द्रधनुष रौंदे हुये ये 1957,अरी ओ करुणा प्रभामय 1959,आँगन के पार द्वार 1961, कितनी नावों में कितनी बार (1967), क्योंकि मैं उसे जानता हूँ (1970), सागर मुद्रा (1970), पहले मैं सन्नाटा बुनता हूँ (1974), महावृक्ष के नीचे (1977), नदी की बाँक पर छाया (1981), प्रिज़न डेज़ एण्ड अदर पोयम्स (अंग्रेजी में,1946)।[4]

कहानियाँ:-विपथगा 1937, परम्परा 1944, कोठरीकी बात 1945, शरणार्थी 1948, जयदोल 1951
उपन्यास:-शेखर एक जीवनी- प्रथम भाग(उत्थान)1941, द्वितीय भाग(संघर्ष)1944,नदीके द्वीप 1951, अपने अपने अजनबी 1961 ।
यात्रा वृतान्त:- अरे यायावर रहेगा याद? 1943,एक बूँद सहसा उछली 1960।
निबंध संग्रह : सबरंग, त्रिशंकु, आत्मनेपद, आधुनिक साहित्य: एक आधुनिक परिदृश्य, आलवाल।
आलोचना:- त्रिशंकु 1945, आत्मनेपद 1960, भवन्ती 1971, अद्यतन 1971 ई.।
संस्मरण: स्मृति लेखा
डायरियां: भवंती, अंतरा और शाश्वती।
विचार गद्य: संवत्‍सर
नाटक: उत्तरप्रियदर्शी
जीवनी: राजकमल राय द्वारा लिखित शिखर से सागर तक
संपादित ग्रंथ:- आधुनिक हिन्दी साहित्य (निबन्ध संग्रह)1942, तार सप्तक (कविता संग्रह) 1943, दूसरा सप्तक (कविता संग्रह)1951, तीसरा सप्तक (कविता संग्रह), सम्पूर्ण 1959, नये एकांकी 1952, रूपांबरा 1960।

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 कुछ मुझ सा ही मुझमे रहता है। कौन हूँ मै बस रोज यही कहता है।।- वैभव रश्मि वर्मा