तुमको तुमसे चुराया था अपने दिल मे बसाया था।
न लग जाये किसी की नज़र इसलिए जग से छुपाया था।।
और कुछ न था ज़िन्दगी में मेरी एक तेरे सिवा।
बस इतना ही है गुनाह के ये तुझसे छुपाया था।।-VAIBHAVRV
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कुछ मुझ सा ही मुझमे रहता है। कौन हूँ मै बस रोज यही कहता है।।- वैभव रश्मि वर्मा
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आज ऑफिस जाते वक़्त जब घर से कार ले कर निकला ही था के कुछ दूर जाते ही कार ख़राब हो गयी। पास के गैराज में जा कर मिस्त्री को दे आया के शाम तक...
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