Friday, June 7, 2019

पिंजड़ा

दरख़्तों से दूर अपनी पहचान बना लेता है।
वो तो पिंजड़े को अपना जहाँ बना लेता है।।
जीना तो तुझसा था मगर
तू भी उसे ला कर गुलाम बना लेता है। -VAIBHAVRV

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 कुछ मुझ सा ही मुझमे रहता है। कौन हूँ मै बस रोज यही कहता है।।- वैभव रश्मि वर्मा