हिंदी शायरी, हिंदी कहानी, स्वरचित रचना
रहते है वो रूठ के हमसे ज़माने भर में। देख के उन्हें महफ़िल में मुस्कुराना भी ज़रूरी था।। ज़रूरी था तेरी आँखों मे डूब जाना मगर। तेरा मुझसे नज़रे मिलना भी ज़रूरी था।।-VAIBHAVRV ©merelafzonse
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कुछ मुझ सा ही मुझमे रहता है। कौन हूँ मै बस रोज यही कहता है।।- वैभव रश्मि वर्मा
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