हिंदी शायरी, हिंदी कहानी, स्वरचित रचना
कहीं खो गया था ज़िन्दगी के सफ़र में। तुमने फिर यादों के शहर में ला कर छोड़ दिया।।- वैभव रश्मि वर्मा
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कुछ मुझ सा ही मुझमे रहता है। कौन हूँ मै बस रोज यही कहता है।।- वैभव रश्मि वर्मा
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