Monday, August 5, 2019

बुझा दो चराग

बुझा दो चरागों को कि ज़माना भी देखे।
है रोशन मेरा जहान महबूब के नूर से।।-VAIBHAVRV

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 कुछ मुझ सा ही मुझमे रहता है। कौन हूँ मै बस रोज यही कहता है।।- वैभव रश्मि वर्मा