Monday, June 10, 2019

नींद

आंखों ने अब नींद चढ़ी है, नज़रे अब छत पर ही गड़ी है।
मैं तो चाहूँ कुछ पल को सोना, भूल के सारा रोना धोना।।-VAIBHAVRV

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 कुछ मुझ सा ही मुझमे रहता है। कौन हूँ मै बस रोज यही कहता है।।- वैभव रश्मि वर्मा