Tuesday, June 23, 2020

मेरेलफ़्जोंसे 19


आएंगे एक दिन शहर तुम्हारे।
इश्क़ का तोहफ़ा लेकर साथ।।
है इश्क़ तुमको भी अगर।
बस थाम लेना मेरा हाथ।।

तेरे हाथों की लकीरों में मेरा नाम नही न सही।
हर बात पे मेरा ज़िक्र तेरे होठो पे आना कम भी  नही।।

खुद को मजनूं कहूँ तो कोई बात नही।
वो भी लैला सी होती तो कुछ बात होती।।

आओ चले आज उस शहर ।
जहां हम तुम साथ होते थे।।
ख़्वाबों में बिछड़ के भी।
हम हक़ीक़त में रोते थे।।-VAIBHAV RASHMI VERMA

Monday, June 22, 2020

शिवालो में

भटके भटके फ़िरे जहां में।
गलियों और चौबारों में।।
हमे मिला खुद के ही भीतर।
तुमने क्या देखा शिवालो में।।-VAIBHAV RASHMI VERMA

Tuesday, June 16, 2020

मैं कौन हूँ?

मैं कौन हूँ?©

लोग कहते है तुम शायर हो कुछ कहते है तुम कहानीकार हो।
कोई आशिक़ तो कोई पागल भी कहता है।।

पर सवाल तो वही है "मैं कौन हूँ?"

तुम कहते हो मैं समाज का आईना हूँ।
समाज की बात समाज के सामने जो रखता हूँ।
वो कहता है कि मैं एक दोस्त हूँ जो दूसरों के अकेलेपन का साथी बन जाता हूं।।

एक कहता है कि मैं खुद ही खुद का दर्द हूँ जो शब्दो मे नज़र आता हूँ।
दूसरा कहता है मैं वो शोर हूँ जो सोये समाज को जागता हूँ।।

पर सवाल वही है "मैं कौन हूँ?"
मैं क्या बताऊँ अब की "मैं कौन हूँ?"- VAIBHAV RASHMI VERMA

Saturday, June 6, 2020

मेरेलफ़्जोंसे 17

वो खत थे मेरे तेरे नाम के।
जिन्हें लोगो ने ग़ज़ल का नाम दिया है।।-VAIBHAV RASHMI VERMA

मुर्दे को भी जीना सिखाओगे क्या।
आशिक़ हूँ मुझे इश्क़ सिखाओगे क्या।।- VAIBHAV RASHMI VERMA

Friday, June 5, 2020

मेरेलफ़्जोंसे 03

जाके भी हम दूर तुमसे जी न सके।
है इस दिल में इश्क़ भरा कितना वो भी कह न सके-VAIBHAV RASHMI VERMA

 कुछ मुझ सा ही मुझमे रहता है। कौन हूँ मै बस रोज यही कहता है।।- वैभव रश्मि वर्मा