ज़िन्दगी की दौड़ में खो गया हूँ कहीं
अगर तुझे मिले तो मुझे मुझसे मिलवाना कभी -VAIBHAVRV
Sunday, January 27, 2019
Friday, January 25, 2019
दरख़्त
यूँ हीं दरख़्तों से पत्ते गिरे न होंगे दोस्तो
शायद किसी पंक्षी ने आशियाँ कबूला न होगा -VAIBHAVRV
Wednesday, January 23, 2019
ज़िन्दगी 1
ये ज़िन्दगी है यारो ये कहां साथ निभाती है -VAIBHAVRV
Friday, January 18, 2019
ये कैसा इश्क़ है
ये कैसी इश्क़ की शुरुआत हुई।
ख़्याल, फ़िक़्र, परवाह सब भूल गए
बस जिस्मों के मिलने की बात हुई ।। -VAIBHAVRV
Sunday, January 13, 2019
माँ 2
Karke pareshaan tumko rulaya hai
Jab kabhi tum samjhati thi sahi galat ka farq mujhe
Har baat ko tumhari ansuna karke kadmo ko apne badhaya hai
Na socha kabhi ki kaise kaati zindgi apni dard aur taklif me ki main rah sakoon aaraam se
Par ab hai waqt mera kuchh karne ka chhod ke har khushi apni tumhari khushi ka sochna hai
jisne sambhala saari umr mujhe usko kuchh to lautana hai- VAIBHAVRV
खो गए है
वो जो खो गए है ज़िन्दगी की दौड़ में।
कभी तुमसे कभी खुद से आगे निकलने की होड़ में।।
ज़िन्दगी जीने के अभाव में, बेढंगे से स्वभाव में।
झूठे से रुबाब में, अधूरे से ख़्वाब में।।
जो बिक गए है ज़िम्मेदारियों के दांव में।
चलो उन्हें अब ले चले फिर बचपने के गाँव मे।।
माँ के आंचल की छांव में।
वो जो खो गए है ज़िन्दगी की दौड़ में।।-VAIBHAVRV
Sunday, January 6, 2019
Tuesday, January 1, 2019
एक तारा
मैंने देखा था एक तारे को आसमां में खोते हुए
दिन के उजाले में भी रोते हुए।
कोई होता जो पूछता हाल उसका
आखिर क्यों दिखता है अक़्सर आँसुओ की माला पिरोते हुए।।-VAIBHAVRV
कुछ मुझ सा ही मुझमे रहता है। कौन हूँ मै बस रोज यही कहता है।।- वैभव रश्मि वर्मा
-
आज ऑफिस जाते वक़्त जब घर से कार ले कर निकला ही था के कुछ दूर जाते ही कार ख़राब हो गयी। पास के गैराज में जा कर मिस्त्री को दे आया के शाम तक...
-
वो तो माँ थी जो सब सह गयी। कभी खाना पसंद का न था तो कभी पहनने को कपड़े, फिर भी वो चुप थी। ऑफिस की गुस्सा उसपर चिल्ला कर निकालना भी तुम्हे सही...