Sunday, January 13, 2019

खो गए है

वो जो खो गए है ज़िन्दगी की दौड़ में।
कभी तुमसे कभी खुद से आगे निकलने की होड़ में।।
ज़िन्दगी जीने के अभाव में, बेढंगे से स्वभाव में।
झूठे से रुबाब में, अधूरे से ख़्वाब में।।
जो बिक गए है ज़िम्मेदारियों के दांव में।
चलो उन्हें अब ले चले फिर बचपने के गाँव मे।।
माँ के आंचल की छांव में।
वो जो खो गए है ज़िन्दगी की दौड़ में।।-VAIBHAVRV

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 कुछ मुझ सा ही मुझमे रहता है। कौन हूँ मै बस रोज यही कहता है।।- वैभव रश्मि वर्मा