मैंने देखा था एक तारे को आसमां में खोते हुए
दिन के उजाले में भी रोते हुए।
कोई होता जो पूछता हाल उसका
आखिर क्यों दिखता है अक़्सर आँसुओ की माला पिरोते हुए।।-VAIBHAVRV
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
कुछ मुझ सा ही मुझमे रहता है। कौन हूँ मै बस रोज यही कहता है।।- वैभव रश्मि वर्मा
-
वो तो माँ थी जो सब सह गयी। कभी खाना पसंद का न था तो कभी पहनने को कपड़े, फिर भी वो चुप थी। ऑफिस की गुस्सा उसपर चिल्ला कर निकालना भी तुम्हे सही...
-
वो बन्द कमरे में रोती थी क्योंकि वो घर की बेटी थी। सुबह सबसे पहले उठती थी फिर बैठ आंगन में बर्तन धोती थी। घर के कमरे हो या आंगन सबका झाड़ू प...
No comments:
Post a Comment