हर शब महफ़िल तेरी यादों की लगाते है
साथ तेरे गुज़रे लम्हो को बुलाते है
न हो रुस्वा तेरा इश्क़ कभी महफ़िल में
इसलिए मरीज़-ए-इश्क़ बनाने का इल्ज़ाम सब पर लगाते है -VAIBHAVRV
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
कुछ मुझ सा ही मुझमे रहता है। कौन हूँ मै बस रोज यही कहता है।।- वैभव रश्मि वर्मा
-
आज ऑफिस जाते वक़्त जब घर से कार ले कर निकला ही था के कुछ दूर जाते ही कार ख़राब हो गयी। पास के गैराज में जा कर मिस्त्री को दे आया के शाम तक...
-
वो तो माँ थी जो सब सह गयी। कभी खाना पसंद का न था तो कभी पहनने को कपड़े, फिर भी वो चुप थी। ऑफिस की गुस्सा उसपर चिल्ला कर निकालना भी तुम्हे सही...
No comments:
Post a Comment