हिंदी शायरी, हिंदी कहानी, स्वरचित रचना
यूँ हीं दरख़्तों से पत्ते गिरे न होंगे दोस्तो शायद किसी पंक्षी ने आशियाँ कबूला न होगा -VAIBHAVRV
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कुछ मुझ सा ही मुझमे रहता है। कौन हूँ मै बस रोज यही कहता है।।- वैभव रश्मि वर्मा
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