Friday, January 25, 2019

दरख़्त

यूँ हीं दरख़्तों से पत्ते गिरे न होंगे दोस्तो
शायद किसी पंक्षी ने आशियाँ कबूला न होगा -VAIBHAVRV

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 कुछ मुझ सा ही मुझमे रहता है। कौन हूँ मै बस रोज यही कहता है।।- वैभव रश्मि वर्मा