Monday, May 28, 2018

अफ़साना

लिख देते है सौ अफ़साने जब याद तेरी आ जाती है।
मुस्कान कभी दे जाती है, कभी अश्को को बहाती है।।
हम दिल को मनाया करते है दिल हमको मनाया करता है।
लिख देते है सौ अफ़साने जब याद तेरी आ जाती है।।-VAIBHAV RASHMI VERMA

Friday, May 25, 2018

बहार

तुझे चाहे मांगे अब रब से हम, दुआ करे सौ बार
बरसो तरसे तेरे प्यार को , अब मिले मीत बहार-VAIBHAVRV

शायरी

बदल देते है लफ़्ज़ों को शायरी में हम
शायद तुझे पढ़ना पसंद है - VAIBHAVRV

Tuesday, May 22, 2018

बेवफ़ा

इस मोहब्बत की महफ़िल में बेवफ़ा ही मिले हमे
बावफ़ा जो थे वो जन्नतनसी ही दिखे -VAIBHAVRV

Monday, May 21, 2018

दिल

"आज दिल थोड़ा खुश तो थोड़ा ग़मज़दा भी है
वो दिल के करीब तो कुछ जुदा भी है "-VAIBHAVRV
(21/05/2017)

Friday, May 18, 2018

तन्हाई

रिश्ता हमारा इस जहान में सबसे प्यारा हो
जैसे ज़िन्दगी को साँसों का सहारा हो
याद रखना हमे उस पल में भी तुम
जब महफ़िल में भी हो तन्हा हम और तन्हाई में भी सारा जहान तुम्हारा हो- VAIBHAVRV

Thursday, May 17, 2018

कोई तो वज़ह होगी


कोई तो वज़ह होगी
 भाग -1

रात के 9 बज रहे है, घर मे सब है, सिवाए राज केआज तो उसकी कोचिंग की भी छुट्टी हैफिर भी पता नही वो अभी तक घर क्यों नही आया? घबराते हुए राज की माँ (लता) ने रसोई से बोला। आखिर घबराती भी क्यों राज सुबह सबसे झगड़ा करके जो गया था, उसको अपनी पसंद की लड़की से शादी जो करनी थी। 9 से 10 और 10 से 11 बजने को आये पर राज का अभी भी कुछ पता नही था, अब तो घर मे सब लोग परेशान और चिंता में थे, के तभी दरवाज़े पर दस्तक हुई। राज की बहन महक दौड़ते हुए दरवाज़े पर गयी पर उदास मन से वापस आयी और माँ से बोलीचिंटू आया था बता रहा था के बगल वाले वोबन्सी काका’, उनका स्वर्ग-वास हो गया इतने में दरवाज़ा खोलते हुए राज अंदर आया और दुखी मन से बोलामाँ मुझे उस लड़की से शादी नही करनी, तुम को जहां सही लगे वही शादी कर लूँगा।इतना बोल-कर राज अपने कमरे में चला गया।
देखते देखते 4 महीने बीत गए और राज नौकरी के लिए दूसरे शहर चला गया। इन 4 महीनों में राज ने कभी अपनी उस दोस्त का नाम तक नही लिया जिससे वो इतना ज्यादा प्यार करता था, सुबह शाम जिससे फ़ोन पर बात किया करता था उस लड़की को जैसे वो भूल ही गया हो। हाँ कुछ उदास से रहने लगा था पर किसी से कुछ कहता नही था।
राज के दूसरे शहर जाने के बाद एक दिन महक उसके कमरे की सफाई कर रही थी कि उसको एक डायरी मिली जो राज किसी को छूने नही देता था। महक तो ऐसे खुश हुई जैसे उसको कोई ख़जाना मिल गया हो। पर उस डायरी को पढ़ते हुए महक की आँखों मे नमी गयी।
आखिर आज महक को पता जो चल गया था  के उसका जो भाई हमेशा हँसता रहता था, वो इतना शांत क्यों रहने लगा था।

कहानी जारी …………...


 कुछ मुझ सा ही मुझमे रहता है। कौन हूँ मै बस रोज यही कहता है।।- वैभव रश्मि वर्मा