कोई तो वज़ह होगी
भाग -1
रात के 9 बज रहे है, घर मे सब है, सिवाए राज के “आज तो उसकी कोचिंग की भी छुट्टी है” फिर भी पता नही वो अभी तक घर क्यों नही आया? घबराते हुए राज की माँ (लता) ने रसोई से बोला। आखिर घबराती भी क्यों न राज सुबह सबसे झगड़ा करके जो गया था, उसको अपनी पसंद की लड़की से शादी जो करनी थी। 9 से 10 और 10 से 11 बजने को आये पर राज का अभी भी कुछ पता नही था, अब तो घर मे सब लोग परेशान और चिंता में थे, के तभी दरवाज़े पर दस्तक हुई। राज की बहन महक दौड़ते हुए दरवाज़े पर गयी पर उदास मन से वापस आयी और माँ से बोली “चिंटू आया था बता रहा था के बगल वाले वो ‘बन्सी काका’, उनका स्वर्ग-वास हो गया”। इतने में दरवाज़ा खोलते हुए राज अंदर आया और दुखी मन से बोला “माँ मुझे उस लड़की से शादी नही करनी, तुम को जहां सही लगे वही शादी कर लूँगा।” इतना बोल-कर राज अपने कमरे में चला गया।
देखते देखते 4 महीने बीत गए और राज नौकरी के लिए दूसरे शहर चला गया। इन 4 महीनों में राज ने कभी अपनी उस दोस्त का नाम तक नही लिया जिससे वो इतना ज्यादा प्यार करता था, सुबह शाम जिससे फ़ोन पर बात किया करता था उस लड़की को जैसे वो भूल ही गया हो। हाँ कुछ उदास से रहने लगा था पर किसी से कुछ कहता नही था।
आखिर आज महक को पता जो चल गया था के उसका जो भाई हमेशा हँसता रहता था, वो इतना शांत क्यों रहने लगा था।
कहानी जारी …………...

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