हिंदी शायरी, हिंदी कहानी, स्वरचित रचना
आंखों ने अब नींद चढ़ी है, नज़रे अब छत पर ही गड़ी है। मैं तो चाहूँ कुछ पल को सोना, भूल के सारा रोना धोना।।-VAIBHAVRV
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कुछ मुझ सा ही मुझमे रहता है। कौन हूँ मै बस रोज यही कहता है।।- वैभव रश्मि वर्मा
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