हिंदी शायरी, हिंदी कहानी, स्वरचित रचना
जानता नही दिल की बात तुझसे मैं कैसे कहदूँ।
लिखदूँ ग़ज़ल या कोई शायरी करदूँ।।
करदूँ खुद को तेरे नाम या तुझे अपना हिस्सा करदूँ।
या भूल के तुझे खत्म अपने इश्क़ का किस्सा करदूँ।।-VAIBHAVRV
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कुछ मुझ सा ही मुझमे रहता है। कौन हूँ मै बस रोज यही कहता है।।- वैभव रश्मि वर्मा
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