Sunday, May 13, 2018

ख़्वाब

चले हम फिर उन राहों पर
जिनकी मंजिल  तू नहीं
देख रहे है ख्वाब ऐसे
नजर मे है पर साथ तू नहीं- VAIBHAVRV

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 कुछ मुझ सा ही मुझमे रहता है। कौन हूँ मै बस रोज यही कहता है।।- वैभव रश्मि वर्मा