हिंदी शायरी, हिंदी कहानी, स्वरचित रचना
चले हम फिर उन राहों पर जिनकी मंजिल तू नहीं देख रहे है ख्वाब ऐसे नजर मे है पर साथ तू नहीं- VAIBHAVRV
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कुछ मुझ सा ही मुझमे रहता है। कौन हूँ मै बस रोज यही कहता है।।- वैभव रश्मि वर्मा
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