यही तो है ज़िन्दगी जो तुम बिन अधूरी रह गयी
वो बात जो होंठो में दबी रह गयी
न कही न सुनी न कभी शब्दो मे लिख पाए हम
जो तुम्हारे साथ सुरों सी सजी वो तुम बिन गूंगी आवाज हो गयी
जो कभी बारिश की बूंदों सी गीली थी आज रेत सी चुभने लगी
तो तन्हाई में हँसाती थी आज महफ़िल में भी रुला गयी
यही तो है ज़िन्दगी जो तुम बिन अधूरी रह गयी -VAIBHAVRV
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