Wednesday, February 15, 2023

 मत छोडो अकेला की तन्हारी भी महफ़िल से ज्यादा भाने लगे।

भीड़ हज़ारो की खाने लगे।

-VAIBHAV RASHMI VERMA 


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 कुछ मुझ सा ही मुझमे रहता है। कौन हूँ मै बस रोज यही कहता है।।- वैभव रश्मि वर्मा