Thursday, July 15, 2021

मरुधर

मैं ख़तों में क्या लिखूँ मेरा हाल तुम जानते हो।
दिल को मेरे तुम मरुधर, आँखों को बादल मानते हो।

हर बात मेरी है तुम्ही से, खत्म तुम पर ही हो रही है।
छोड़ तन्हा आज मुझको, तुम क्यों जानम रो रही हो।-वैभव रश्मि वर्मा

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 कुछ मुझ सा ही मुझमे रहता है। कौन हूँ मै बस रोज यही कहता है।।- वैभव रश्मि वर्मा