हिंदी शायरी, हिंदी कहानी, स्वरचित रचना
मेरी महफ़िल में कुछ चराग़ बस इसलिए जलते है। कि जब जाए मुझे तन्हा छोड़ कर तुझे कही कोई ठोकर न लगे।।-VAIBHAVRV
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कुछ मुझ सा ही मुझमे रहता है। कौन हूँ मै बस रोज यही कहता है।।- वैभव रश्मि वर्मा
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