Saturday, August 3, 2019

रोटी

मैंने देखा था जब वो रोटी छिपा के लाती थी।


मुश्किल और गरीबी में भी मुझे भर पेट खिलाती थी।।


ज़ख्म भरे हाथ थे उसके पर फिर भी वो मुस्काती थी ।।


बिन डाँटे प्यार से मुझको हर बात मुझे समझती थी।


देख मुझे तक़लीफ़ में यारो वो माँ कहाँ सो पाती थी।।


खुद रहती थी भूखी मुझे भर पेट खिलाती थी।


मैंने देखा था जब वो रोटी छिपा के लाती थी।-VAIBHAVRV

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 कुछ मुझ सा ही मुझमे रहता है। कौन हूँ मै बस रोज यही कहता है।।- वैभव रश्मि वर्मा