रहते है वो रूठ के हमसे ज़माने भर में।
देख के उन्हें महफ़िल में मुस्कुराना भी ज़रूरी था।।
ज़रूरी था तेरी आँखों मे डूब जाना मगर।
तेरा मुझसे नज़रे मिलना भी ज़रूरी था।।-VAIBHAVRV
©merelafzonse
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
कुछ मुझ सा ही मुझमे रहता है। कौन हूँ मै बस रोज यही कहता है।।- वैभव रश्मि वर्मा
-
वो तो माँ थी जो सब सह गयी। कभी खाना पसंद का न था तो कभी पहनने को कपड़े, फिर भी वो चुप थी। ऑफिस की गुस्सा उसपर चिल्ला कर निकालना भी तुम्हे सही...
-
वो बन्द कमरे में रोती थी क्योंकि वो घर की बेटी थी। सुबह सबसे पहले उठती थी फिर बैठ आंगन में बर्तन धोती थी। घर के कमरे हो या आंगन सबका झाड़ू प...
No comments:
Post a Comment