हिंदी शायरी, हिंदी कहानी, स्वरचित रचना
यूँ तो किताबों से बहुत सीखा था मैंने ज़िन्दगी क्या है मुझे सिखाया तुमने। रोज़ छोड़ दिया था थाली में मैंने उठा कर बच्चे का पेट भरा था तुमने।। -vaibhavrv
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कुछ मुझ सा ही मुझमे रहता है। कौन हूँ मै बस रोज यही कहता है।।- वैभव रश्मि वर्मा
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