किसी के दिल से न पूँछों इन्तेहाँ इश्क़ की होती है क्या यारों।
मेरे लफ़्ज़ों से सुनलो हर दर्द मिलेगा इसमे यारों।।
कभी हीर को देखा कभी साहिबा से मिला।
बयाँ करे कहानी इनकी हर लफ़्ज़ अश्क़ का कतरा है यारों।।
थाम के हाथ महबूब का शोलो पर चले थे यारों।
साँसों की गर्मी कभी अश्क़ों की बरसात है ये इश्क़ यारों।।
-VAIBHAVRV
मेरे लफ़्ज़ों से सुनलो हर दर्द मिलेगा इसमे यारों।।
कभी हीर को देखा कभी साहिबा से मिला।
बयाँ करे कहानी इनकी हर लफ़्ज़ अश्क़ का कतरा है यारों।।
थाम के हाथ महबूब का शोलो पर चले थे यारों।
साँसों की गर्मी कभी अश्क़ों की बरसात है ये इश्क़ यारों।।
-VAIBHAVRV
No comments:
Post a Comment