कोई तो वज़ह होगी
भाग -2
अब तक आपने पढ़ा के.........
राज अपने घर को छोड़
दुसरे शहर नौकरी की लिए चला जाता है। इसी बीच उसकी बहन
महक को घर की सफाई करते वक़्त राज के कमरे में उसकी लिखी डायरी मिलती है और वो उस डायरी
को पढने लगती है। जो डायरी राज ने उन
चार महीनो में लिखी थी जो उसने बड़ी ही ख़ामोशी से बिता दिए थे ।
अब आगे ........
महक डायरी के पहले
पन्ने को खोलती है और पढना शुरू करती है।
“मैं राज पर ये बस नाम
ही है राज जैसा कुछ नहीं, राज होता तो शायद हर वो चीज पा लेता जिस चीज को पाना
चाहतामेरा प्यार मेरी जिंदगी मेरा सब कुछ जो थी जिसको मैंने खुद से ज्यादा चाहा था
‘मेरी रागनी’।
वैसे तो सब कुछ है
मेरे पास माँ बाप और एक प्यारी सी बहन जो हर वक़्त किसी न किसी बात पर
झगडती रहती है। पर कहते है न के जिंदगी में किसी एक की ख़ास जगह
होती है जो आपकी जिंदगी में खुशिया ले आता है, हर खाली जगह को भर देता है। मुझे भी ऐसे ही किसी की तलाश थी और वो तलाश भी एक
दिन पूरी हो गयी जब मैंने उसको पहली बार देखा था वो जनवरी की पहली तारीख थी जब
मेरी क्लास में सब लोग नए साल की पार्टी की तैयारी में लगे हुए थे और मेरे साथ पढ़ाने
वाली टीचर नेहा अपनी एक दोस्त को लेकर पार्टी में आई थी। उसको पहली नज़र में देखते ही मैं तो जैसे कही खो सा गया था।
इसी बीच नेहा ने
मुझे आवाज देकर मुझसे बोला राज सर ये है मेरी दोस्त रागनी। हमने एक दुसरे को हेल्लो कहा और मैं वापस अपने काम में लग गया। पार्टी के बाद मैं अपने घर आ गया पर बार-बार
रागनी का चेहरा सामने आता रहा। फिर एक दिन मैंने
नेहा से रागनी की बात की फिर दो-चार दिन बाद नेहा ने मुझे रागनी का नम्बर दिया। फिर वही रोज़ रात को देर तक बात करने का सिलसिला
शुरू हो गया देखते ही देखते तीन महीने बीत गए और मैंने एक दिन रागनी से अपनी दिल
की बात बोल ही दी कि मैं उसको पसंद करता हूँ। पर दिल में कही डर भी था के कहीं वो नाराज़ न हो जाए। पर उसके बाद उसने मुझसे एक हफ्ते बात नहीं की न
मेरे मैसेज का जवाब देती और न मेरी कॉल उठाती फिर उसने खुद अपनी तरफ से कॉल की और
मुझसे कहा की वो भी मुझे पसंद करती है।
अब हम दोनों इस नए
रिश्ते को और ज्यादा वक़्त देने लगे थे। अब वो फ़ोन पर बात
करना और बढ़ गया था और अब हम तो कभी पार्क तो कभी रेस्टोरेंट में मिलने लगे। धीरे धीरे हम और करीब आते गए और अब ऐसा हाल हो
गया के एक दुसरे से बिना बात किये हमारा दिन ही नहीं होता था। फिर हम दोनों ने एक दिन शादी करने का निश्चित किया और मैंने ये बात
अपने घर में बताई के एक लड़की है जिसको मैं पसंद करता हूँ और उसी से शादी करूँगा। फिर रागनी ने एक दिन मुझे बताया के उसने अपने घर में मेरी
और उसकी शादी की बात की है और उसकी माँ मुझसे बात करना चाहती है। उसके बाद कई दफा
मैंने उनसे बात की और वो सिर्फ इतना ही कहती की राज घर आओ शादी तो हमें अपनी बेटी
की करनी ही है तो पहले कुछ जान पहचान तो हो जाए अब तो हम सब लोग राज़ी है। पर न
जाने एक दिन क्या हुआ के रागनी ने नेहा को मैसेज करके बोल दिया के अब राज से कह
देना के मुझसे बात करने की ज़रूरत नहीं मेरे घर वालो ने मेरी शादी कही और तय कर दी
है अब अगर वो मुझे कॉल या मैसेज करेगा तो मैं खुद को ख़त्म कर लुंगी। मुझे समझ नहीं
आया के आखिर ऐसा क्या हुआ जो उसने ऐसा बोला वो भी मेरी दोस्त से न के मुझसे और
किस्मत का भी खेल देखो के उसने भी ये बात उस दिन ककी जिस दिन मैं उसके लिए अपने घर
वालो से लड़ रहा था।
पर उसके बाद तो जैसे मेरी जिंदगी और रागनी के साथ बिताया वक़्त एक रहस्य बन गया
रोज़ नए नए खुलासे होने लगे जिनकी मुझे कभी उम्मीद न थी।
अब उसकी कही और शादी हो गयी है पर एक सवाल आज भी दिन में उठता रहता है की कोई तो वज़ह होगी जो उसने मेरे साथ ऐसा किया।”
आखरी पन्ने पर सिर्फ एक लाइन लिखी थी – मेरी खता बस ये थी के मैंने तुझे खुद
से ज्यादा और खुदा से पहले रखा..........
डायरी को बंद करते हुए महक की आँखे नम थी पर उसने वो डायरी छुपा दी और फिर कभी
भी राज से भी उस डायरी का ज़िक्र नहीं किया क्यों की डायरी के कुछ पन्ने ऐसे भी थे,
जो महक नहीं चाहती थी के उन पन्नो में लिखी बाते किसी को भी पता चले॥

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