हिंदी शायरी, हिंदी कहानी, स्वरचित रचना
लफ़्ज़ भी थे और जज़्बात भी हज़ार
सज़ा था तेरी बेवफ़ाई का बाज़ार
देख तेरे चाहने वालों की चाहत
हम गुज़रे जब वहाँ से तो बेवफ़ा हमको बुलाया सौ बार। -VAIBHAVRV
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कुछ मुझ सा ही मुझमे रहता है। कौन हूँ मै बस रोज यही कहता है।।- वैभव रश्मि वर्मा
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