Thursday, April 19, 2018

Mohabbat

वो ढूढते रहे मेरे लफ़्ज़ों में मोहब्बत

बड़े नादान थे उनको पता ही नही के क्या है मोहब्बत

कभी होंठो की हँसी तो आँखों के अश्क़ है मोहब्बत

कभी मिलना तो कभी जुदाई है मोहब्बत

जो बसी थी नज़रो में मेरे वही तो थी मेरी मोहब्बत

वो नादान जान न सके के क्या है मोहब्बत-VAIBHAVRV

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 कुछ मुझ सा ही मुझमे रहता है। कौन हूँ मै बस रोज यही कहता है।।- वैभव रश्मि वर्मा