संग खेलेंगे संग घूमेंगे अपनी बचपन की गलियों में
बहुत लड़ेंगे बहुत झगड़ेगे हम बचपन की गलियों में
वक़्त जो होगा पढ़ने का तो संग बैठ के पढ़ लेगे
होगी जो मुश्किल राहे संग चल के गुज़र लेगे
छोटी छोटी बात पे माँ हम अपनी बहन से हारेंगे
जो होगी उसके चेहरे पे हँसी हम जान भी अपनी वारेगें
जो होगी तकलीफ कही पर उसकी ढाल बन जायगे
बचपन की ये सारी बाते दर्द बड़ा दे जाती है
जब रातो को रोज़ किसी की बहन कही खो जाती है -VAIBHAVRV
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