Monday, April 9, 2018

बचपन

देख के तुम्हे बचपन मे खोना चाहते है
हम जी भर के बारिश में भींगना चाहते है
जो छोड़ दी थी गलियां कभी हमने
अब उन गलियों में खो जाना चाहते है
हाथो में टूटे गुलाब के फूल
कपड़ो पे लगी गीली माटी
थक चुके है इस भाग दौड़ से हम
अब तो फिर बचपन मे लौट जाने को जी चाहता है -VAIBHAVRV

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 कुछ मुझ सा ही मुझमे रहता है। कौन हूँ मै बस रोज यही कहता है।।- वैभव रश्मि वर्मा