Sunday, April 29, 2018

परिंदा

उड़ जा रे परिंदे अब तेरा यहां न कोई
सबको खुद की चिंता है तेरी कराह सुने न कोई -VAIBHAVRV

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 कुछ मुझ सा ही मुझमे रहता है। कौन हूँ मै बस रोज यही कहता है।।- वैभव रश्मि वर्मा